घटस्थापना: कथा, आरती, विधि और कलश स्थापना का महत्व
नवरात्रि के पीछे की कथा, चरण-दर-चरण कलश स्थापना, परिवारों द्वारा गाई जाने वाली आरती और अनुष्ठान का अर्थ।
घटस्थापना, जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं, नवरात्रि का पहला अनुष्ठान है। यह नासिक कुंभ यात्रा की गाइड है, जो इस अनुष्ठान को चरण-दर-चरण समझाती है। पवित्र मिट्टी का घट तैयार किया जाता है, जौ या सप्त धान्य बोए जाते हैं, और जल से भरा कलश रखकर नौ दिनों के लिए घर में देवी का आवाहन किया जाता है। शारदीय नवरात्रि 2026 घटस्थापना के साथ 11 अक्टूबर को शुरू होती है। यह गाइड पर्व के पीछे की कथा, चरण-दर-चरण विधि, कलश और बोए गए दानों का अर्थ, परिवारों द्वारा गाई जाने वाली आरती, घटस्थापना के नियम और अनुष्ठान का महत्व बताती है। यह पहली बार कलश स्थापित करने वाले परिवारों और नासिक कुंभ यात्रा (nashikkumbhyatri.com) से ठहरने की योजना बनाने वाले यात्रियों के लिए है।

घटस्थापना क्या है?
घटस्थापना का शाब्दिक अर्थ है 'घट (मिट्टी का पात्र) की स्थापना'। इसमें दो मुख्य प्रतीक हैं: मिट्टी के घट में बोए गए अन्न के दाने, जो जीवन और वृद्धि के प्रतीक हैं, और उस पर रखा कलश, जो देवी के आवास का प्रतीक है। यह केवल एक सजावट नहीं, बल्कि एक संकल्प है: नौ दिनों तक घर में भक्ति, संयम और सेवा का वातावरण रहेगा।
कथा — देवी का आवाहन क्यों होता है
परंपरा बताती है कि महिषासुर ने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान पाया था कि उसे कोई पुरुष या देवता नहीं मार सकता। सत्ता के मद में उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और देवताओं को निकाल दिया। तब सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई, जो माँ दुर्गा के रूप में साकार हुई। हर देवता ने उन्हें अपना अस्त्र दिया: शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने सुदर्शन चक्र, इंद्र ने वज्र, और अन्य देवताओं ने भी शस्त्र दिए।
नौ रात-दिन युद्ध चला। महिषासुर बार-बार रूप बदलता रहा: कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी मनुष्य और कभी हाथी। हर रूप पर देवी ने विजय पाई, और दसवें दिन, विजयादशमी को, उन्होंने उसका वध किया। घटस्थापना उसी युद्ध का आरंभ है: घर में देवी को नौ दिनों की पूजा के लिए आमंत्रित किया जाता है, ताकि वे परिवार की रक्षा करें।
कथा के विवरण क्षेत्र और ग्रंथों के अनुसार बदलते हैं, इसलिए परिवार अक्सर अपनी तरह से सुनाते हैं। साहस, भक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत के मूल विषय सब जगह समान हैं।
विधि — चरण-दर-चरण
- स्थान तैयार करें: पूजा का कोना साफ करें, स्वच्छ वस्त्र बिछाएं, और अनुष्ठान से पहले स्नान करें।
- घट में परतें बनाएं: मिट्टी के घट में तीन परतों में मिट्टी डालें, और हर परत पर सप्त धान्य या जौ के दाने बिखेरें। हल्की मिट्टी डालकर उन्हें ढक दें।
- कलश सजाएं: छोटे कलश के गले में मौली बांधें, उसे स्वच्छ जल से भरें, और उसमें सुपारी, इत्र, दूर्वा, चावल और सिक्के डालें।
- पत्ते लगाएं: कलश के किनारे पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें, और ढक्कन से ढकें।
- नारियल सजाएं: नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर मौली से बांधें, और कलश के ऊपर रखें।
- घट पर रखें: कलश को बोए गए घट पर रखें, प्रतिपदा के शुभ समय में, रात में या अमावस्या पर नहीं।
- आवाहन और पूजा: कलश में देवी दुर्गा का आवाहन करें, फिर पंचोपचार पूजा करें (दीपक, धूप, फूल, इत्र और भोग)।
यह क्रम ड्रिक पंचांग की घटस्थापना गाइड पर आधारित है। कुछ परिवार अपने कदम जोड़ते हैं; मूल बात कलश, दाने और आवाहन है।

घटस्थापना की सामग्री
| सामग्री | इसका उपयोग |
|---|---|
| मिट्टी का घट और साफ मिट्टी | जिसमें जौ बोए जाते हैं |
| सप्त धान्य या जौ के बीज | तीन परतों में बोए जाते हैं; नौ दिनों में अंकुरित होते हैं |
| साफ जल के साथ छोटा कलश | वह पात्र जिसमें देवी का आवाहन होता है |
| मौली, सुपारी, सिक्के, इत्र | कलश पर बांधे और अर्पित किए जाते हैं |
| पांच पत्ते (आम या अशोक) | कलश के किनारे पर रखे जाते हैं |
| साबुत चावल, दूर्वा घास, फूल | अर्पित किए जाते हैं और कलश में रखे जाते हैं |
| लाल वस्त्र में लिपटा नारियल | कलश के ऊपर रखा जाता है |
| लाल वस्त्र, दीपक, घी, कपूर, धूप | पंचोपचार पूजा के लिए |
घटस्थापना के नियम — क्या करें, क्या न करें
- करें: घटस्थापना सुबह करें, जब प्रतिपदा तिथि प्रबल हो।
- करें: कलश का जल रोज़ बदलें या उसे ताज़ा रखें, और जौ के अंकुरों को नियमित जल दें।
- करें: घट की जगह स्वच्छ और शांत रहे; वहां जूते-चप्पल या गंदगी न हो।
- न करें: रात में या अमावस्या पर घटस्थापना न करें।
- न करें: कलश या घट को बिना देखे या बिना प्रार्थना के न हटाएं; नौ दिन पूरे होने पर विसर्जन परंपरा अनुसार करें।
कलश और बोए गए दानों का महत्व
कलश देवी की उपस्थिति का पात्र है। उसका जल समृद्धि और जीवन का प्रतीक है, नारियल पूर्णता और कल्याण का, और आम या अशोक के पत्ते शुभता और आरोग्य के। बोए गए दाने वृद्धि का संकेत हैं: वे नौ दिनों में अंकुरित होते हैं, और नवरात्रि के अंत में अंकुर को शुभ मानकर परिवार में बांटा जाता है। पूरा अनुष्ठान याद दिलाता है कि घर रोज़ की भक्ति से पवित्र होता है, और वृद्धि के लिए नौ दिन की देखभाल चाहिए।
आरती — जय अम्बे गौरी
परिवार सुबह-शाम दुर्गा आरती गाते हैं। सबसे प्रचलित 'जय अम्बे गौरी' आरती का प्रारंभिक छंद यह है:
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
भावार्थ: Victory to Ambe Gauri, O Mother; victory to Shyama Gauri. Day and night Hari, Brahma and Shiva meditate on you.
आरती के समय दीपक को थाली में घुमाया जाता है, और उपस्थित सभी लोग ताली बजाकर साथ गाते हैं। आरती के बाद प्रसाद बांटा जाता है। पूरी आरती के लिए कोई पूर्ण और विश्वसनीय पाठ इस्तेमाल करें; ऊपर की पंक्तियां सबसे अधिक पहचानी जाने वाली हैं।

नवरात्रि में आरती और मंत्र
घटस्थापना के बाद रोज़ सुबह-शाम आरती होती है। कई परिवार नवरात्रि के मंत्रों में नवार्ण मंत्र का जप करते हैं: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। यह मंत्र देवी के नौ अक्षरों वाले रूप की स्तुति माना जाता है, और इसका जप माला से किया जा सकता है।
अनुष्ठान से आगे — नासिक में दर्शन
नासिक में कई परिवार नवरात्रि में सप्तशृंगी गड पर सप्तशृंगी देवी मंदिर के दर्शन करते हैं, और वसंत व शरद नवरात्रि में यह शक्तिपीठ लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। मंदिर नांदुरी गांव के पास चट्टान में है, नासिक शहर से लगभग 60 किमी उत्तर में।

महाराष्ट्र के साडेतीन शक्तिपीठ
ऊपर दी गई तस्वीर में माँ सप्तशृंगी, नासिक के पास की हैं। इस गाइड की मुख्य तस्वीर में माँ तुल्जा भवानी, तुळजापुर की हैं, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी मानी जाती हैं और विजयादशमी के शस्त्र-पूजन से जुड़ी हैं। महाराष्ट्र में देवी के साडेतीन शक्तिपीठ प्रसिद्ध हैं: नासिक की सप्तशृंगी देवी, तुळजापुर की तुल्जा भवानी, कोल्हापुर की महालक्ष्मी (अंबाबाई), और माहूर की रेणुका देवी (आधा शक्तिपीठ)। नवरात्रि के नौ दिनों में इन चारों स्थानों पर बहुत बड़ी भीड़ जुटती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में घटस्थापना कब है?
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को, प्रतिपदा में। सुबह करें, और सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
जौ क्यों बोए जाते हैं?
जौ नौ दिनों में अंकुरित होता है, जो घर के लिए वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।
क्या घटस्थापना रात में कर सकते हैं?
देखे गए स्रोतों के अनुसार नहीं: यह अनुष्ठान प्रतिपदा के समय सुबह होता है, रात में या अमावस्या पर नहीं।
कलश में कौन-कौन सी चीज़ें डाली जाती हैं?
साफ जल, सुपारी, इत्र, दूर्वा, साबुत चावल और सिक्के। उसके गले में मौली बंधी होती है और ऊपर आम या अशोक के पत्ते लगते हैं।
क्या कथा हर जगह एक जैसी है?
मूल बात एक ही है, पर विवरण क्षेत्र और ग्रंथ के अनुसार बदलते हैं। परिवार अक्सर अपनी तरह से सुनाते हैं।
क्या यह गाइड आधिकारिक स्रोत है?
नहीं। यह प्रकाशित नवरात्रि और पंचांग स्रोतों पर आधारित स्वतंत्र गाइड है। मंदिर समय और आधिकारिक सूचनाओं के लिए मंदिर या स्थानीय प्राधिकरण से पुष्टि करें।
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