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दिवाली पाडवा 2026: महाराष्ट्र में तारीख, औक्षण और परंपराएं

A Abhay Mishra
Published 03 November 2026 6 min read

महाराष्ट्र में दिवाली पाडवा (बलिप्रतिपदा): नासिक की तारीख और तिथि, औक्षण का अर्थ, औक्षण थाली और विधि, राजा बलि की कथा और उपहार के विचार।

सीधा उत्तर

दिवाली पाडवा, जिसे बलिप्रतिपदा भी कहते हैं, Drik Panchang के अनुसार नासिक में सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है; प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक है (कुछ पंचांग मंगलवार, 10 नवंबर बताते हैं)। इस दिन पत्नी पति का औक्षण करती है — जलते दीपक की आरती — और पति उसे उपहार देता है। औक्षण का कोई अलग प्रमाणित मुहूर्त प्रकाशित नहीं है; अपने परिवार का पंचांग देखें।

अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026

दिवाली पाडवा 2026: तारीख और समय

विवरण2026 (नासिक, IST)
तारीख (Drik Panchang, नासिक)सोमवार, 9 नवंबर 2026 — गोवर्धन पूजा और बलिप्रतिपदा एक ही दिन
प्रतिपदा तिथि9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक
गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त9 नवंबर को दोपहर 3:42 से शाम 5:57 तक
अन्य पंचांगकुछ मंगलवार, 10 नवंबर बताते हैं, क्योंकि तिथि उस सुबह तक रहती है
औक्षण मुहूर्तकोई अलग प्रमाणित मुहूर्त नहीं; परिवार परंपरा से पाडवा की सुबह या शाम करते हैं — अपना पंचांग देखें
एक दिन पहले / बादलक्ष्मी पूजन 8 नवंबर; भाईदूज (भाऊबीज) बुधवार 11 नवंबर
स्रोतDrik Panchang, नासिक — 3 नवंबर 2026 को देखा गया

प्रतिपदा तिथि दो दिनों (9 की दोपहर से 10 की दोपहर तक) में फैली है, इसीलिए पंचांग अलग-अलग हैं। नासिक के लिए Drik Panchang गोवर्धन पूजा और बलिप्रतिपदा सोमवार, 9 नवंबर को रखता है। यदि आपका परिवार किसी छपे मराठी कैलेंडर या पंडित जी की सलाह से 10 नवंबर मानता है, तो वही मानें।

दिवाली पाडवा का उपहार और औक्षण: दीपक पकड़े जोड़ा, औक्षण करती पत्नी, रेशमी साड़ी के उपहार बॉक्स पर दिवाली पाडवा कार्ड, कमल रंगोली और कुमकुम-मिठाई वाली पीतल की थाली
रेशमी साड़ी का उपहार और दिवाली पाडवा का कार्ड: पति की ओर से पत्नी को पाडवा का परंपरागत उपहार। AI से बनाया गया चित्र।

दिवाली पाडवा क्या है?

पाडवा शब्द प्रतिपदा से आया है, यानी शुक्ल पक्ष का पहला दिन; यहां लक्ष्मी पूजन की अमावस्या के बाद कार्तिक का पहला दिन। महाराष्ट्र में यह दिवाली का चौथा दिन है और दिवाली पाडवा या बलिप्रतिपदा कहलाता है। यह मुख्यतः महाराष्ट्र और पश्चिम भारत में मनाया जाता है और कुछ जगह नए व्यापार वर्ष की शुरुआत भी है। गुजरात में इसी दिन नववर्ष (बेस्तु वरस) शुरू होता है।

बलिप्रतिपदा: राजा बलि की कथा

बलि (महाबलि) असुरों का उदार राजा और प्रह्लाद का पौत्र था। उसके राज्य में तीनों लोक समृद्ध हुए और देवता उसकी शक्ति से चिंतित हुए। भगवान विष्णु ने बौने ब्राह्मण वामन का रूप लेकर राजा से तीन पग भूमि मांगी। बलि ने स्वीकार किया। वामन ने विराट रूप लिया, दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिए और तीसरे पग के लिए स्थान न रहने पर बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। उसकी विनम्रता से प्रसन्न होकर विष्णु ने उसे पाताल भेजा और वरदान दिया कि वह वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आ सकेगा।

पाडवा उसी आगमन का स्मरण है। महाराष्ट्र में परिवार पांच रंगों की रंगोली से बलि की आकृति बनाकर उसकी पूजा करते हैं और कहते हैं “इडा पिडा टळो, बळीचे राज्य येवो” — “कष्ट दूर हों और बलि का धर्मराज्य लौटे”।

पाडवा शुभ दिन क्यों माना जाता है

पाडवा हिंदू पंचांग के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है और अक्सर परंपरागत साढ़े तीन मुहूर्त में “आधे” मुहूर्त के रूप में बताया जाता है — ऐसा दिन जिसमें किसी नए आरंभ के लिए अलग मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं मानी जाती। लोग सोना खरीदते हैं, नई बही या नया व्यापार वर्ष शुरू करते हैं और नए काम आरंभ करते हैं। विवाहित जोड़े औक्षण और उपहार से इस दिन को मनाते हैं।

औक्षण क्या है? (यह नीलामी नहीं है)

औक्षण (औक्षण), जिसे कभी-कभी ओवाळणे भी कहते हैं, एक पारंपरिक मराठी अनुष्ठान है, जिसमें थाली में रखे जलते दीपक को व्यक्ति के चेहरे के सामने धीरे से घुमाकर दीर्घायु और कल्याण की कामना की जाती है। यह नीलामी (ऑक्शन) नहीं है। दिवाली पाडवा पर पत्नी पति का औक्षण करती है और पति उसे उपहार देता है; भाऊबीज पर बहन भाई का औक्षण करती है। आज कई जोड़े एक-दूसरे का औक्षण करते हैं।

औक्षण थाली की सामग्री

  • पीतल या चांदी की थाली, उसमें छोटा जलता दीपक (निरांजन) या घी का दीया
  • तिलक के लिए कुमकुम (रोली) और हल्दी
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • पान का पत्ता सुपारी सहित, और लड्डू या पेड़ा जैसी मिठाई
  • ताजे फूल या छोटी माला
  • औक्षण करवाने वाले के लिए सिक्का या उपहार
  • छोटा आसन (पाट) और उसके सामने रंगोली

औक्षण विधि: चरण दर चरण

  1. तैयारी। स्नान करें और नए या पारंपरिक कपड़े पहनें। कई महाराष्ट्रीयन जोड़े नऊवारी साड़ी और फेटा या टोपी के साथ कुर्ता चुनते हैं।
  2. पति को बैठाएं रंगोली के सामने पाट पर, हो सके तो पूर्व की ओर मुख करके।
  3. तिलक लगाएं। पत्नी माथे पर कुमकुम और कुछ अक्षत लगाती है।
  4. आरती करें। वह जलते दीपक को उसके चेहरे के सामने दक्षिणावर्त घुमाती है, अक्सर तीन बार, और आशीर्वचन कहती है।
  5. मिठाई खिलाएं और दीर्घायु तथा कल्याण के आशीर्वाद के रूप में कुछ अक्षत दें।
  6. उपहार का आदान-प्रदान। पति उसे उपहार देता है और उसका आशीर्वाद भी लेता है।
  7. बड़ों के चरण छुएं और फराळ परिवार के साथ बांटें।

औक्षण का समय

पाडवा की तिथि ज्ञात है, पर औक्षण का कोई अलग प्रमाणित मुहूर्त प्रकाशित नहीं है। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पाडवा की सुबह स्नान के बाद या शाम को औक्षण करते हैं। सुझाव: कई परिवार प्रतिपदा तिथि रहते किसी सुविधाजनक समय पर औक्षण कर लेते हैं — नासिक में 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक। अपने पंडित जी से पूछें या छपा हुआ मराठी पंचांग देखें।

कोलाज: पारंपरिक महाराष्ट्रीयन वेश में जोड़ा, औक्षण, “दिवाळी पाडवा” लिखी रंगोली, कुमकुम और मिठाई वाली पीतल की थाली, और चकली, करंजी, शंकरपाळे व चिवड़े की फराळ थाली
पाडवा फराळ का भी दिन है: चकली, करंजी, शंकरपाळे और चिवड़ा परिवार और मेहमानों के साथ बांटे जाते हैं। AI से बनाया गया चित्र।

पति या पत्नी के लिए पाडवा उपहार के विचार

  • ₹500 से कम: हाथ से लिखा पत्र, एक पौधा, छोटा चांदी का सिक्का या कोई किताब
  • ₹500–₹2,000: शर्ट या कुर्ता, घड़ी का पट्टा, स्कार्फ, मेवे का डिब्बा या कॉस्मेटिक्स सेट
  • ₹2,000–₹10,000: साड़ी (पैठणी या रेशमी), आभूषण, वॉलेट या जूते
  • अर्थपूर्ण और मुफ्त: समय, साथ बिताया दिन या निभाया हुआ वादा

उपहार की कीमत से अधिक भावना महत्वपूर्ण है। कई परिवार सरल और सोच-समझकर चुना उपहार पसंद करते हैं और खर्च का दबाव नहीं बनाते।

महाराष्ट्र में पाडवा कैसे मनाया जाता है

  • सुबह: स्नान, नए कपड़े और मंदिर दर्शन; कुछ परिवार दिन की शुरुआत तेल स्नान से करते हैं।
  • पति-पत्नी का औक्षण और उपहार; कई परिवार रिश्तेदारों से भी मिलते हैं।
  • रंगोली, और कुछ घरों में पांच रंगों की रंगोली से बलि की पूजा।
  • व्यापारी नए साल का हिसाब शुरू करते हैं; सोना खरीदना लोकप्रिय है।
  • फराळ और परिवार के साथ त्योहारी भोजन।
  • शाम को दीपोत्सव: दीपक, रोशनी और कहीं-कहीं आतिशबाजी।

नासिक में दिवाली पाडवा

इस पृष्ठ के समय नासिक के लिए हैं। शाम को कई परिवार आंगन और प्रवेश द्वार पर दीपक जलाते हैं; यदि आप पंचवटी और गोदावरी घाटों की रोशनी देखने जा रहे हैं, तो याद रखें कि दिवाली सिंहस्थ कुंभ मेले के शुरुआती सप्ताहों में पड़ रही है और भीड़ सामान्य से अधिक होगी। यात्रा और पार्किंग की योजना पहले से बनाएं।

संबंधित दिवाली लेख

एक दिन पहले के लिए दिवाली 2026 कैलेंडर और लक्ष्मी पूजन 2026 गाइड पढ़ें। भाऊबीज बुधवार, 11 नवंबर को है, और नासिक में दोपहर (अपराह्न) का समय 1:26 से 3:41 बजे है (Drik Panchang)।

समय के बारे में। इस लेख की तिथियां और मुहूर्त नासिक (IST) के हैं, जो Drik Panchang पर प्रकाशित हैं और 3 नवंबर 2026 को देखे गए हैं। दूसरी वेबसाइटें अलग शहर या अलग गणना के कारण अलग समय दिखाती हैं। ये प्रकाशित गणनाएं हैं, अंतिम धार्मिक निर्णय नहीं — अपनी परंपरा अलग हो तो पंडित जी या स्थानीय पंचांग का पालन करें। वर्णित औक्षण की परंपराएं पारंपरिक हैं और परिवार के अनुसार बदलती हैं।
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Frequently Asked Questions

2026 में दिवाली पाडवा कब है?

नासिक के लिए Drik Panchang गोवर्धन पूजा और बलिप्रतिपदा सोमवार, 9 नवंबर 2026 को बताता है; प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक है। कुछ पंचांग मंगलवार, 10 नवंबर बताते हैं।

दिवाली पाडवा 2026 पर औक्षण का मुहूर्त क्या है?

औक्षण का कोई अलग प्रमाणित मुहूर्त प्रकाशित नहीं है। परिवार परंपरा से पाडवा की सुबह या शाम करते हैं; अपने परिवार का पंचांग या पंडित जी देखें।

औक्षण का क्या अर्थ है?

औक्षण एक पारंपरिक मराठी अनुष्ठान है जिसमें थाली में रखे जलते दीपक को व्यक्ति के चेहरे के सामने घुमाकर आशीर्वाद दिया जाता है। यह नीलामी नहीं है।

पाडवा पर पत्नी पति का औक्षण क्यों करती है?

पाडवा पति-पत्नी के एक-दूसरे को सम्मान देने का दिन है: पत्नी औक्षण से पति की दीर्घायु की कामना करती है और वह उसे उपहार देता है। आज कई जोड़े एक-दूसरे का औक्षण करते हैं।

बलिप्रतिपदा क्या है?

बलिप्रतिपदा पाडवा है, वह दिन जो राजा बलि का स्मरण कराता है, जिन्हें वामन ने पाताल भेजा और वर्ष में एक बार प्रजा से मिलने का वरदान दिया।

क्या दिवाली पाडवा मराठी नववर्ष है?

ठीक वैसे नहीं। मराठी नववर्ष वसंत में गुढी पाडवा है। दिवाली पाडवा कई व्यापारियों के लिए नए व्यापार वर्ष की शुरुआत है, और गुजरात में इसी दिन नववर्ष शुरू होता है।

औक्षण कैसे किया जाता है?

पत्नी पति के माथे पर कुमकुम और चावल लगाती है, थाली में रखे जलते दीपक को उसके चेहरे के सामने अक्सर तीन बार घुमाती है, मिठाई खिलाती है और उपहार पाती है; आज कई जोड़े एक-दूसरे का औक्षण करते हैं।

औक्षण की थाली में क्या रखा जाता है?

जलता दीपक, कुमकुम, हल्दी, अक्षत (चावल), पान का पत्ता सुपारी सहित, मिठाई, ताजे फूल और सिक्का या छोटा उपहार।

पाडवा पर पति क्या उपहार दे सकता है?

साड़ी, आभूषण, घड़ी का पट्टा या सादा हाथ से लिखा पत्र — कीमत से अधिक भावना मायने रखती है।

क्या भाऊबीज की तारीख अलग है?

हां। भाऊबीज (भाईदूज) बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है; नासिक में दोपहर (अपराह्न) का समय 1:26–3:41 बजे है (Drik Panchang)।

A
Abhay Mishra — AI Engineer at TechnoVeda AI Solutions

Abhay Mishra is an AI engineer at TechnoVeda AI Solutions in Nashik, Maharashtra. He built the Nashik Kumbh Yatri platform and researches ground-level logistics, temple traditions, transit routes and civic updates for the 2026–2028 Nashik-Trimbakeshwar Simhastha Kumbh Mela. About the author & our editorial standards →

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