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लक्ष्मी पूजन 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री

A Abhay Mishra
Published 03 November 2026 7 min read

लक्ष्मी पूजन रविवार, 8 नवंबर 2026 को है; नासिक में मुहूर्त शाम 6:22–8:22। चरण-दर-चरण पूजा विधि और पूरी सामग्री सूची।

सीधा उत्तर

लक्ष्मी पूजन 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। नासिक में सबसे उत्तम समय प्रदोष / वृषभ (स्थिर लग्न) काल, शाम 6:22 से 8:22 बजे तक है। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होती है (Drik Panchang, नासिक, IST)।

अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026

लक्ष्मी पूजन 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

विवरण2026 (नासिक, IST)
तारीखरविवार, 8 नवंबर 2026
अमावस्या तिथि8 नवंबर सुबह 11:27 से 9 नवंबर दोपहर 12:31 तक
लक्ष्मी पूजन मुहूर्तशाम 6:22 से 8:22 बजे (2 घंटे)
प्रदोष कालशाम 5:57 से 8:30 बजे
वृषभ काल (स्थिर लग्न)शाम 6:22 से 8:22 बजे
स्रोतDrik Panchang, नासिक — 3 नवंबर 2026 को देखा गया

परंपरा में अमावस्या की सूर्यास्त के बाद की शाम (प्रदोष काल) को और उसमें भी स्थिर लग्न यानी वृषभ लग्न को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि मान्यता है कि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी घर में स्थिर रहती हैं। नासिक में दोनों एक ही दो घंटे में आते हैं — शाम 6:22 से 8:22। अन्य वेबसाइटें अलग समय दिखाती हैं (जैसे दिल्ली के लिए 5:47 या मुंबई के लिए 6:01 बजे) क्योंकि मुहूर्त शहर के सूर्यास्त पर निर्भर करता है — नासिक में हों तो नासिक का समय ही लें।

दिवाली की शाम किसकी पूजा होती है?

पूजा माता लक्ष्मी को समृद्धि के लिए, भगवान गणेश को निर्विघ्न पूजा के लिए (उनकी पूजा सबसे पहले होती है) और कई घरों में धन के रक्षक कुबेर को अर्पित की जाती है। व्यापारी परिवारों में बही-खाते (चोपड़ा) और व्यापार के औजारों की भी पूजा होती है। कुछ परिवार माता सरस्वती की पूजा भी जोड़ते हैं; अपनी कुल परंपरा के अनुसार करें।

लक्ष्मी पूजन की सामग्री

लक्ष्मी पूजन सामग्री: कुमकुम, हल्दी, चावल, कमल के आकार का दीपक, घंटी, नारियल सहित कलश और मिठाई वाली पीतल की पूजा थाली
लक्ष्मी पूजन सामग्री सूची व्यवहार में: कुमकुम, हल्दी, चावल, दीपक, नारियल सहित कलश और मिठाई थाली में सजी हुई। AI से बनाया गया चित्र।
  • लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या तस्वीर, और यदि आपके यहां प्रथा हो तो कुबेर यंत्र या चित्र
  • लाल या पीला वस्त्र और लकड़ी की चौकी
  • कलश (पीतल या तांबे का) जल, आम के पत्ते और नारियल के साथ
  • अक्षत (चावल), कुमकुम (रोली), हल्दी, चंदन और मौली
  • ताजे फूल — कमल और गेंदा श्रेष्ठ — तथा माला
  • घी या तेल के दीपक, कपास की बाती, अगरबत्ती और कपूर
  • पान के पत्ते सुपारी सहित, फल, नारियल और मिठाई जैसे बताशे, लड्डू या खीर
  • कई महाराष्ट्रीयन घरों में: लाह्या (खील), बताशे और धने-गुड़ का नैवेद्य
  • सिक्के, चांदी के सिक्के या नोट, और यदि पूजा करते हों तो बही-खाते

लक्ष्मी पूजन विधि: चरण दर चरण

  1. घर तैयार करें। घर की सफाई करें, प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और सूर्यास्त पर बाहर दीपक जलाएं। दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं।
  2. चौकी सजाएं। वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके रखें, पास में कलश और सामने थाली रखें।
  3. संकल्प लें। मूर्तियों के सामने बैठकर मुख्य दीपक जलाएं और अपने शब्दों में पूजा का उद्देश्य बोलें।
  4. सबसे पहले गणेश पूजन। “ॐ गं गणपतये नमः” कहते हुए फूल, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
  5. लक्ष्मी आवाहन। फूल अर्पित करें, मूर्ति को स्नान कराएं या जल छिड़कें, कुमकुम-हल्दी लगाएं, माला और कमल चढ़ाएं।
  6. मंत्र जाप। “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” सामान्यतः बोला जाने वाला मंत्र है; आप महालक्ष्मी अष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।
  7. नैवेद्य अर्पित करें। मिठाई, फल और सिक्के देवी के सामने रखें और दीपक जलता रखें।
  8. आरती करें। कपूर या घी के दीपक से आरती करें, घंटी बजाएं और प्रसाद सभी को दें।
  9. समापन। दरवाजे, आंगन और तुलसी के पास दीपक जलाएं। कई परिवार पूजा के सिक्के तिजोरी या गल्ले में रखते हैं।
दिवाली लक्ष्मी पूजन के लिए कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी, कलश, सोने के सिक्के, गेंदे के फूल और जलते दीपक
कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी — दिवाली की शाम के लक्ष्मी पूजन का केंद्र। AI से बनाया गया चित्र।

अमावस्या की रात लक्ष्मी की पूजा क्यों होती है?

अमावस्या महीने की सबसे अंधेरी रात है; उस पर दीप जलाकर उसे प्रकाश का उत्सव बना दिया जाता है। मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी स्वच्छ और रोशन घरों में आती हैं, इसलिए घर साफ किया जाता है, द्वार खुले रखे जाते हैं और हर जगह दीपक जलाए जाते हैं। चौकी पर रखा कलश समृद्धि का, कमल पवित्रता का और सिक्के धन के प्रतीक हैं — परिवार प्रार्थना करता है कि वह धन विवेक से उपयोग हो।

लक्ष्मी पूजन की महाराष्ट्रीय परंपराएं

महाराष्ट्र में इस दिन की कुछ अपनी बातें हैं। कई घरों में झाड़ू (केरसुणी) की पूजा होती है, क्योंकि वह घर को स्वच्छ रखती है और लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक मानी जाती है। व्यापारी परिवार चोपड़ा पूजन करते हैं — नई बही पर “शुभ लाभ” और स्वस्तिक बनाकर कलम और गल्ले के साथ उसकी पूजा की जाती है। लाह्या, बताशे और धने-गुड़ का नैवेद्य चढ़ाया जाता है और फराळ पड़ोसियों व मेहमानों में बांटा जाता है।

क्या करें और क्या न करें

  • सूर्यास्त से घर को साफ और रोशन रखें; कई परिवार पूजा के समय मुख्य द्वार खुला रखते हैं।
  • शांत मन से और संभव हो तो पूरे परिवार के साथ पूजा करें।
  • जल्दबाजी न करें: श्रद्धा से की गई छोटी पूजा भी पूर्ण मानी जाती है।
  • सूर्यास्त से पहले पूजा शुरू करने से बचें; यात्रा में हों तो प्रदोष काल में जितनी जल्दी हो सके पूजा करें।
  • ये पारंपरिक मान्यताएं हैं; इनसे किसी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

लक्ष्मी पूजन की शाम का समय-क्रम (नासिक, 8 नवंबर)

समय (IST)क्या करें
शाम 5:30 से पहलेसफाई पूरी करें, रंगोली बनाएं, चौकी सजाएं और थाली तैयार रखें
शाम 5:57प्रदोष काल शुरू — द्वार और आंगन में दीपक जलाएं
शाम 6:22लक्ष्मी पूजन मुहूर्त और वृषभ काल शुरू — संकल्प और गणेश पूजन करें
शाम 6:30–8:00लक्ष्मी आवाहन, नैवेद्य, मंत्र और आरती
रात 8:22मुहूर्त समाप्त — आरती पूरी करें और प्रसाद बांटें
रात 8:30प्रदोष काल समाप्त — दीपक जगमगाएं, फराळ बांटें, परिवार के साथ समय बिताएं

लक्ष्मी पूजन के मंत्र और आरती

  • गणेश: “ॐ गं गणपतये नमः”
  • लक्ष्मी बीज मंत्र: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
  • लक्ष्मी गायत्री: “ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्”
  • कुबेर: “ॐ कुबेराय नमः”
  • आरती: पूजा के अंत में दीपक और घंटी के साथ पारंपरिक “ॐ जय लक्ष्मी माता” गाई जाती है।

हर मंत्र श्रद्धा से बोलें — चाहें तो 11 या 108 बार, समय कम हो तो एक बार भी। संख्या एक रिवाज है, अनिवार्यता नहीं। आपके पंडित जी श्रीसूक्त जैसे अतिरिक्त पाठ भी सुझा सकते हैं।

दुकानों और व्यवसाय के लिए लक्ष्मी पूजन

व्यापारी परिवार नई बही-खातों (चोपड़ी पूजन), गल्ले, कलम और व्यापार के औजारों के साथ लक्ष्मी की पूजा करते हैं। नई बही के पहले पृष्ठ पर स्वस्तिक और “शुभ लाभ” लिखा जाता है। दुकानें अक्सर घरों वाले शाम के मुहूर्त का ही पालन करती हैं; दुकान देर से बंद होती हो तो कई मालिक पहले दुकान में पूजा करके फिर घर जाते हैं। आपके व्यवसाय की परंपरा में अलग समय हो तो पंडित जी से पूछें।

इन गलतियों से बचें

  • सूर्यास्त से पहले पूजा शुरू करना या घर को अंधेरा और अव्यवस्थित छोड़ना।
  • सबसे पहले गणेश पूजन करना भूल जाना।
  • मेहमान आ गए हैं इसलिए आरती जल्दी निपटा देना — आरती में परिवार को साथ रखें।
  • पूजा को सौदा समझना: यह पर्व कृतज्ञता की प्रार्थना है और धन को विवेक से उपयोग करने का स्मरण है।
  • द्वार और तुलसी के पास दीपक न जलाना, जो लक्ष्मी के स्वागत के संकेत हैं।

पूजा के बाद

दीपक को जितनी देर हो सके जलने दें और रात भर घर को रोशन रखें। प्रसाद और फराळ परिवार और पड़ोसियों में बांटें। अगली सुबह गोवर्धन पूजा और पाडवा है (अपना कैलेंडर देखें), जब पति-पत्नी औक्षण और उपहार का आदान-प्रदान करते हैं, और पर्व 11 नवंबर को भाईदूज के साथ पूर्ण होता है।

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समय के बारे में। इस लेख की सभी तिथियां और मुहूर्त नासिक (IST) के हैं, जो Drik Panchang पर प्रकाशित हैं और 3 नवंबर 2026 को देखे गए हैं। दूसरी वेबसाइटें अलग शहर या अलग गणना के कारण अलग समय दिखाती हैं। ये प्रकाशित गणनाएं हैं, अंतिम धार्मिक निर्णय नहीं — अपनी परंपरा अलग हो तो अपने पंडित जी या स्थानीय पंचांग का पालन करें।
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Frequently Asked Questions

8 नवंबर 2026 को नासिक में लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त क्या है?

शाम 6:22 से 8:22 बजे, जो प्रदोष और वृषभ (स्थिर लग्न) दोनों का समय है। प्रदोष काल शाम 5:57 से 8:30 बजे तक रहता है (Drik Panchang, नासिक, IST)।

क्या लक्ष्मी पूजन मुहूर्त के बाहर किया जा सकता है?

परंपरा प्रदोष / स्थिर लग्न को श्रेष्ठ मानती है, पर जो परिवार उस समय घर पर नहीं होते वे शाम को देर से भी पूजा करते हैं। आपकी परंपरा में कोई विशेष नियम हो तो अपने पंडित जी से पूछें।

दिवाली की रात किन देवताओं की पूजा होती है?

माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा होती है; कई घरों में कुबेर की और व्यापारी परिवारों में बही-खातों की भी पूजा होती है।

क्या घर पर लक्ष्मी पूजन के लिए पंडित जी की जरूरत है?

नहीं। ऊपर बताई विधि से परिवार घर पर पूजा कर सकता है; जब परिवार पूर्ण वैदिक विधि या विशेष संकल्प चाहता है तब पंडित जी को बुलाया जाता है।

अलग-अलग वेबसाइट पर मुहूर्त अलग क्यों होता है?

मुहूर्त शहर के सूर्यास्त और गणना पद्धति पर निर्भर करता है, इसलिए दिल्ली, मुंबई या पुणे के आधार पर बनी वेबसाइटें अलग समय देती हैं। अपने शहर का समय ही उपयोग करें।

माता लक्ष्मी को कौन से फूल चढ़ाए जाते हैं?

कमल सबसे श्रेष्ठ फूल है, उसके बाद गेंदा और गुलाब। ताजे फूल और माला चढ़ाएं; मुरझाए फूल न चढ़ाएं।

क्या लक्ष्मी पूजन दोपहर में हो सकता है?

परंपरा प्रदोष की शाम को श्रेष्ठ मानती है, इसलिए मुख्य पूजा सामान्यतः दोपहर में नहीं होती। यात्रा में हों तो शाम में थोड़ी जल्दी छोटी पूजा कर सकते हैं या पंडित जी से विकल्प पूछें।

क्या दुकानों और दफ्तरों में लक्ष्मी पूजन होता है?

हां। व्यापारी नई बही-खातों, गल्ले और व्यापार के औजारों के साथ लक्ष्मी की पूजा करते हैं, आमतौर पर घरों वाले शाम के मुहूर्त में ही।

पूजा के सिक्कों और दीपक का पूजा के बाद क्या करें?

कई परिवार पूजा के सिक्के गल्ले या तिजोरी में रखते हैं और दीपक को अपने आप बुझने देते हैं। अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

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Abhay Mishra — AI Engineer at TechnoVeda AI Solutions

Abhay Mishra is an AI engineer at TechnoVeda AI Solutions in Nashik, Maharashtra. He built the Nashik Kumbh Yatri platform and researches ground-level logistics, temple traditions, transit routes and civic updates for the 2026–2028 Nashik-Trimbakeshwar Simhastha Kumbh Mela. About the author & our editorial standards →

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