गोवर्धन पूजा 2026: तारीख, मुहूर्त, कथा और अन्नकूट भोग
2026 में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट: नासिक की तारीख और मुहूर्त, श्रीकृष्ण और इंद्र की कथा, पूजा विधि, 56 भोग का अन्नकूट और गौ-पूजा।
नासिक के लिए Drik Panchang के अनुसार गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है; प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक है और सायंकाल मुहूर्त दोपहर 3:42 से शाम 5:57 है। उत्तर भारत के कई पंचांग इसे मंगलवार, 10 नवंबर को मानते हैं। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र की वर्षा से वृंदावन की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण है; इस दिन अन्नकूट (भोजन का पर्वत) और गौ-पूजा होती है।
अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026
गोवर्धन पूजा 2026: तारीख और मुहूर्त
| विवरण | 2026 |
|---|---|
| तारीख (Drik Panchang, नासिक) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 |
| प्रतिपदा तिथि | 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक |
| गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त | 9 नवंबर को दोपहर 3:42 से शाम 5:57 तक |
| अन्य पंचांग | मंगलवार, 10 नवंबर — उस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा रहती है |
| महाराष्ट्र में उसी दिन | बलिप्रतिपदा / दिवाली पाडवा — हमारा दिवाली पाडवा गाइड देखें |
| एक दिन पहले / बाद | लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर; भाईदूज बुधवार 11 नवंबर |
| स्रोत | Drik Panchang, नासिक — 3 नवंबर 2026 को देखा गया |
प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर की दोपहर से शुरू होकर 10 नवंबर की दोपहर तक रहती है, इसलिए पंचांगों में तारीख अलग है। Drik Panchang की नासिक सूची गोवर्धन पूजा और बलिप्रतिपदा को 9 नवंबर को रखती है। उत्तर भारत के पंचांग, जो सूर्योदय पर तिथि के आधार पर दिन तय करते हैं, 10 नवंबर बताते हैं। अपने परिवार के पंचांग या मंदिर का पालन करें।
गोवर्धन पूजा क्या है?
गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट (“अन्न का पर्वत”) भी कहते हैं, उत्तर भारत में दिवाली का चौथा दिन है, लक्ष्मी पूजन की अमावस्या के अगले दिन। भक्त गोबर (या आटे) से छोटा गोवर्धन पर्वत बनाते हैं, उसे फूलों और दीपों से सजाते हैं, उसकी पूजा और परिक्रमा करते हैं और फिर श्रीकृष्ण को भांति-भांति का भोजन अर्पित करते हैं। गायों को सजाया और खिलाया जाता है। गुजरात में यह दिन नववर्ष बेस्तु वरस (विक्रम संवत 2083) है और महाराष्ट्र में बलिप्रतिपदा / दिवाली पाडवा।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है? श्रीकृष्ण और इंद्र की कथा
भागवत पुराण के अनुसार वृंदावनवासी हर वर्ष देवराज इंद्र की, जो वर्षा के दाता हैं, बड़ी पूजा करते थे। बाल श्रीकृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए समझाया, क्योंकि वही पर्वत उनके पशुओं को चारा देता था और पशु गांव का पालन करते थे। क्रोधित इंद्र ने भयंकर वर्षा भेजी जिसने कई दिन वृंदावन को जलमग्न कर दिया। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को छोटी उंगली पर उठा लिया और सभी लोगों व गायों को सात दिन उसके नीचे आश्रय दिया। अंत में इंद्र को अपने अहंकार का बोध हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण को प्रणाम किया। यह कथा विनम्रता और उस भूमि व पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पाठ है जो समाज का पालन करते हैं।
घर पर गोवर्धन पूजा विधि: चरण दर चरण
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। नए या स्वच्छ वस्त्र पहनें। कई परिवार आंगन साफ करके रंगोली बनाते हैं।
- गोवर्धन बनाएं। आंगन में या थाली पर गोबर (गोबर न हो तो आटे) से छोटा पर्वत बनाएं। कुछ परिवार चेहरे सहित मानव आकृति का गोवर्धन बनाकर गाय और ग्वालों की छोटी मूर्तियां रखते हैं।
- सजाएं। फूल, कुछ हरी पत्तियां, छोटे दीपक और परंपरा हो तो ऊपर छोटा ध्वज लगाएं।
- पूजा करें। कुमकुम-हल्दी लगाएं और फूल, धूप, अक्षत (चावल), जल और दीपक अर्पित करें।
- अन्नकूट अर्पित करें। गोवर्धन और श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने भांति-भांति के पकवान, मिठाई और फल भोग में रखें।
- परिक्रमा करें। गोवर्धन की दक्षिणावर्त परिक्रमा श्रीकृष्ण का नाम जपते या गाते हुए करें।
- गौ-पूजा करें। गाय और बछड़ों को माला पहनाएं, ताजी घास खिलाएं और प्रसाद परिवार में बांटें।
गोवर्धन पूजा सामग्री
- गोवर्धन बनाने के लिए गोबर (या आटा)
- गेंदे के फूल, मालाएं और कुछ पत्तियां
- कुमकुम, हल्दी, अक्षत (चावल) और चंदन
- घी या तेल के दीपक, धूप और कपूर
- श्रीकृष्ण की तस्वीर या मूर्ति, और गाय व ग्वालों की छोटी आकृतियां
- अन्नकूट के लिए भांति-भांति का पका भोजन, मिठाई और फल
- गायों के लिए ताजी घास या भीगा अनाज
- छोटा ध्वज (वैकल्पिक) और रंगोली के रंग

अन्नकूट: भोजन का पर्वत
अन्न यानी भोजन और कूट यानी ढेर, इसलिए अन्नकूट का अर्थ है भोजन का पर्वत, जो गोवर्धन पर्वत की स्मृति में श्रीकृष्ण को अर्पित किया जाता है। मंदिरों और घरों में कई व्यंजन बनते हैं और कुछ मंदिर 56 भोग (छप्पन भोग) अर्पित करते हैं। फिर यह प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। कई स्थानों पर अन्नकूट के दर्शन पूरे दिन खुले रहते हैं।

| प्रकार | सामान्यतः अर्पित किए जाने वाले उदाहरण |
|---|---|
| मिठाइयां | लड्डू, पेड़ा, बर्फी, खीर, हलवा, जलेबी, श्रीखंड |
| नमकीन और रोटियां | पूरी, कचौड़ी, भजिया, पोहा, थेपला या भाकरी (क्षेत्र के अनुसार) |
| चावल और कढ़ी | सादा और मसालेदार चावल, खिचड़ी, कढ़ी, दाल |
| सब्जियां | मौसम की मिली-जुली सब्जी, आलू और हरी सब्जियों के व्यंजन |
| दूध से बने | दही, मक्खन, छाछ और पनीर के व्यंजन |
| फल और मेवे | केला, सेब, अनार, अंगूर, मेवे और किशमिश |
| अन्य | पापड़, अचार, चटनी और अंकुरित अनाज |
व्यंजनों की संख्या श्रद्धा का विषय है। घर पर 5, 11 या 21 व्यंजनों का भोग मंदिर के 56 भोग जितना ही सच्चा है। ताजा, शाकाहारी भोजन का उपयोग करें और प्रसाद बांटें।
गोवर्धन पूजा और गौ-पूजा
कथा गोवर्धन पर्वत और उन पशुओं का सम्मान करती है जिन्होंने वृंदावन का पालन किया, इसलिए इस दिन गायों की पूजा होती है। गांवों में उन्हें नहलाया, रंगा, माला पहनाई जाती है और खिलाया जाता है। पशुओं के प्रति कोमल रहें: उन्हें लंबे समय तक बांधकर न रखें, भीड़ न लगाएं और पका या मीठा भोजन न दें। पास में गाय न हो तो शांत समय पर किसी गोशाला जाएं या ताजा चारा दान करें।
भारत में गोवर्धन पूजा
| क्षेत्र | नाम और परंपरा |
|---|---|
| ब्रज और उत्तर भारत | गोवर्धन पूजा और अन्नकूट; गोबर का गोवर्धन, परिक्रमा और मंदिरों में अन्नकूट दर्शन |
| गुजरात | बेस्तु वरस — नववर्ष; नए वस्त्र, मंदिर दर्शन और वैष्णव मंदिरों में अन्नकूट दर्शन |
| महाराष्ट्र | बलिप्रतिपदा / दिवाली पाडवा — पति-पत्नी का औक्षण और राजा बलि की पूजा |
| अन्य स्थान | दिवाली के अगले दिन स्थानीय विविधताओं के साथ; अपने समुदाय का पंचांग देखें |
नासिक में गोवर्धन पूजा
नासिक के लिए सायंकाल मुहूर्त 9 नवंबर को दोपहर 3:42 से शाम 5:57 है। नासिक के मंदिर और घर इस दिन को अधिकतर बलिप्रतिपदा और पाडवा के रूप में मनाते हैं, इसलिए बड़े अन्नकूट से अधिक औक्षण और फराळ दिख सकता है। पंचवटी और गोदावरी घाटों के पास दिवाली की रोशनी देखने जाने की योजना हो तो सामान्य से अधिक भीड़ की उम्मीद रखें, क्योंकि दिवाली सिंहस्थ कुंभ मेले के शुरुआती सप्ताहों में है; कुंभ कैलेंडर के लिए नासिक कुंभ गाइड देखें।
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Frequently Asked Questions
2026 में गोवर्धन पूजा कब है?
नासिक के लिए Drik Panchang गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 नवंबर 2026 को बताता है; प्रतिपदा 9 नवंबर दोपहर 12:31 से 10 नवंबर दोपहर 2:00 तक है। उत्तर भारत के पंचांग मंगलवार, 10 नवंबर बताते हैं।
नासिक में गोवर्धन पूजा का मुहूर्त क्या है?
सायंकाल मुहूर्त 9 नवंबर 2026 को दोपहर 3:42 से शाम 5:57 तक है (Drik Panchang, नासिक, IST)। नासिक के लिए प्रातःकाल का मुहूर्त प्रकाशित नहीं है।
गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?
यह भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सात दिन तक छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र की वर्षा से वृंदावन की रक्षा करने की स्मृति है, जो प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता सिखाती है।
अन्नकूट क्या है?
अन्नकूट का अर्थ है भोजन का पर्वत। श्रीकृष्ण को भांति-भांति के पकवान अर्पित किए जाते हैं, कुछ मंदिरों में 56 भोग (छप्पन भोग), और फिर प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं।
घर पर गोवर्धन कैसे बनाते हैं?
गोबर या आटे से छोटा पर्वत बनाएं, फूलों और दीपों से सजाएं, पूजा करें, परिक्रमा करें और भोग लगाएं। ऊपर दी चरण-दर-चरण विधि देखें।
क्या गोवर्धन पूजा और दिवाली पाडवा एक ही हैं?
दोनों एक ही दिन पड़ते हैं। गोवर्धन पूजा उत्तर भारतीय परंपरा है; महाराष्ट्र में यह दिन बलिप्रतिपदा या दिवाली पाडवा है, जिसमें पति-पत्नी का औक्षण होता है।
गोवर्धन पूजा पर गायों की पूजा क्यों होती है?
कथा गोवर्धन पर्वत और वृंदावन का पालन करने वाले पशुओं का सम्मान करती है, इसलिए इस दिन गायों को नहलाया, माला पहनाई और खिलाया जाता है।
Sources
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