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लक्ष्मी जी की आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता): बोल, अर्थ और आरती कैसे करें

A Abhay Mishra
Published 03 November 2026 6 min read

“ॐ जय लक्ष्मी माता” आरती देवनागरी में, हर पद का अर्थ, आरती की थाली और दिवाली 2026 पर आरती कैसे करें, चरण-दर-चरण।

सीधा उत्तर

लक्ष्मी जी की सबसे प्रचलित आरती “ॐ जय लक्ष्मी माता” है, जो लक्ष्मी पूजन के अंत में देवी के सामने जलता दीपक घुमाते हुए गाई जाती है। दिवाली 2026 पर नासिक में लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त रविवार, 8 नवंबर को शाम 6:22 से 8:22 है (Drik Panchang, IST)। इस पृष्ठ पर पूरी आरती देवनागरी में, हर पद का अर्थ और आरती करने की चरण-दर-चरण विधि दी गई है।

अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026

आरती क्या है और क्यों गाई जाती है?

आरती एक भक्ति अनुष्ठान है जिसमें देवता के सामने जलता दीपक घुमाया जाता है, स्तुति का गीत गाया जाता है और घंटी बजाई जाती है। यह पूजा का समापन है: अर्पण के बाद भक्त प्रकाश और गीत से देवता को धन्यवाद देते हैं। फिर लौ सबके पास ले जाई जाती है और हर कोई हाथों से उसकी ऊष्मा लेकर आंखों से लगाता है। आरती कृतज्ञता और साथ का भाव है, और पूरा परिवार आमतौर पर इसमें शामिल होता है।

लक्ष्मी जी की आरती के बोल: “ॐ जय लक्ष्मी माता”

यह हिंदी की पारंपरिक आरती है। हर पद के बाद “ॐ जय लक्ष्मी माता…” की टेक दोहराई जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों और छपी पुस्तकों में थोड़े भिन्न पाठ प्रचलित हैं, इसलिए अपने परिवार की आरती-पुस्तक में भेद हो तो उसी का पालन करें।

आरती (देवनागरी)अर्थ
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
इस आरती में माता लक्ष्मी की जय है। हर (शिव), विष्णु और विधाता (ब्रह्मा) दिन-रात आपकी सेवा करते हैं।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
आप उमा, रमा और ब्रह्माणी हैं, संसार की माता; सूर्य और चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं और नारद ऋषि आपका गुणगान करते हैं।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
निर्मल दुर्गा रूप में आप सुख और संपत्ति देने वाली हैं। भक्ति परंपरा कहती है कि जो आपका ध्यान करता है उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन प्राप्त होता है।
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
आप पाताल में निवास करती हैं और सब शुभ देने वाली हैं। आप कर्मों के प्रभाव को प्रकाशित करती हैं और भवसागर से तारने वाली हैं।
जिस घर में तुम रहती, तब सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥
जिस घर में आप रहती हैं, वहां सब सद्गुण आते हैं; सब कुछ संभव हो जाता है और मन में घबराहट नहीं रहती।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
आपके बिना यज्ञ नहीं होते और कोई वस्त्र नहीं पाता; खान-पान का सारा वैभव आपसे ही आता है।
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहिं पाता॥
आप शुभ गुणों का सुंदर मंदिर हैं, क्षीरसागर से प्रकट हुईं। आपके बिना समुद्र मंथन के चौदह रत्न कोई नहीं पाता।
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
जो भी महालक्ष्मी जी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद समा जाता है और उसके पाप उतर जाते हैं।

धन पाने वाली पंक्ति भक्ति-स्तुति और आस्था का वचन है; यह किसी परिणाम का वादा नहीं है।

लक्ष्मी आरती का कोलाज: सिक्कों के साथ कमल पर लक्ष्मी माता, घंटी और फूलों वाली आरती थाली, हिंदी में आरती का पाठ, आरती करती महिला और “Aarti Meaning” लिखा पृष्ठ
लक्ष्मी आरती: देवी, थाली, बोल और अर्थ एक ही पृष्ठ पर (चित्र का मजकूर हिंदी और अंग्रेजी में)। AI से बनाया गया चित्र।

आरती संक्षेप में: वह क्या कहती है

आरती तीन रूपों में लक्ष्मी की स्तुति करती है। पहला, जगत की माता के रूप में, जो उमा, रमा और ब्रह्माणी के साथ एक हैं और त्रिदेव द्वारा सेवित हैं। दूसरा, कल्याण देने वाली के रूप में, जिनके रहने से घर में सद्गुण आते हैं और मन निर्भय रहता है। तीसरा, वैभव के स्रोत के रूप में, जिनके बिना अन्न, वस्त्र और समुद्र मंथन के चौदह रत्न नहीं मिलते। इस दृष्टि से आरती उन बातों के प्रति कृतज्ञता की प्रार्थना है जो घर का पालन करती हैं।

लक्ष्मी आरती कैसे करें: चरण दर चरण

  1. पहले पूजा पूरी करें। फूल, नैवेद्य और मंत्र अर्पित करें, फिर आरती की तैयारी करें।
  2. आरती की थाली तैयार करें जिसमें घी का जलता दीया, कपूर, घंटी, कुमकुम, चावल और फूल हों।
  3. परिवार को इकट्ठा करें। सब मूर्ति के सामने खड़े हों और संभव हो तो गाने में साथ दें।
  4. घंटी बजाकर गीत शुरू करें। थाली दाहिने हाथ में लेकर “ॐ जय लक्ष्मी माता” गाएं।
  5. दीप को दक्षिणावर्त घुमाएं देवी के सामने, आमतौर पर तीन, पांच या सात बार, या अपने परिवार की रीति से।
  6. लौ सबको दिखाएं। थाली सबके पास ले जाएं और हर व्यक्ति ऊष्मा लेकर आंखों से लगाए।
  7. समापन फूल अर्पित करके और प्रणाम करके करें, फिर प्रसाद बांटें।

आरती थाली सामग्री

  • पीतल या चांदी की थाली (आरती की थाली)
  • सूती बाती के साथ घी का दीया, या कपूर की टिकिया
  • छोटी घंटी
  • कुमकुम (रोली) और अक्षत (चावल)
  • ताजे फूल और छोटी माला
  • थाली गर्म हो जाए तो पकड़ने के लिए कपड़ा
  • आरती के बाद बांटने के लिए प्रसाद (मिठाई और फल)

दिवाली 2026 पर आरती कब गाएं

समय (IST, नासिक)चरण
शाम 5:57प्रदोष काल शुरू — दीपक जलाएं और थाली तैयार करें
शाम 6:22लक्ष्मी पूजन मुहूर्त शुरू — संकल्प, गणेश पूजन, फिर लक्ष्मी आवाहन
लगभग शाम 7:45–8:15आरती, पूजा पूर्ण होने पर मुहूर्त के अंत के पास
रात 8:22मुहूर्त समाप्त — लौ सबको दिखाएं और प्रसाद बांटें

पूरी शाम की योजना हमारे लक्ष्मी पूजन 2026 गाइड में है।

कलश, सोने के सिक्कों, पीतल के दीपकों और गेंदे के साथ कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी, दिवाली की आरती के लिए
कमल पर विराजमान माता लक्ष्मी, दिवाली की आरती में पूजा जाने वाला रूप। AI से बनाया गया चित्र।

लक्ष्मी की अन्य प्रार्थनाएं

  • लक्ष्मी बीज मंत्र: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
  • लक्ष्मी गायत्री: “ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णुपत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्”
  • पूजा से पहले गणेश: “ॐ गं गणपतये नमः”
  • कुछ परिवार श्रीसूक्त या महालक्ष्मी अष्टक भी पढ़ते हैं; पंडित जी से पूछें।

परिवार के साथ आरती गाएं

  • छपी प्रति या बोल वाला फोन पास रखें ताकि बच्चे और मेहमान भी साथ गा सकें।
  • धीरे गाएं; उद्देश्य साथ होना है, प्रदर्शन नहीं।
  • थाली स्थिर पकड़ें और लौ के पास पर्दे या लटकती मालाएं न हों।
  • बच्चे घंटी बजा सकते हैं और प्रसाद ला सकते हैं।
  • धुन न आती हो तो चिंता न करें: श्रद्धा से बोल पढ़ना भी पर्याप्त है।

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समय के बारे में। इस लेख की तिथियां और मुहूर्त नासिक (IST) के हैं, जो Drik Panchang पर प्रकाशित हैं और 3 नवंबर 2026 को देखे गए हैं। दूसरी वेबसाइटें अलग शहर या अलग गणना के कारण अलग समय दिखाती हैं। ये प्रकाशित गणनाएं हैं, अंतिम धार्मिक निर्णय नहीं — अपनी परंपरा अलग हो तो पंडित जी या स्थानीय पंचांग का पालन करें। आरती का पाठ पारंपरिक है; संस्करण अलग-अलग हैं।
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Frequently Asked Questions

लक्ष्मी जी की सबसे लोकप्रिय आरती कौन सी है?

“ॐ जय लक्ष्मी माता” माता लक्ष्मी की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है और दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के अंत में गाई जाती है।

“ॐ जय लक्ष्मी माता” का अर्थ क्या है?

यह लक्ष्मी को जगत की माता, शिव-विष्णु-ब्रह्मा द्वारा सेवित, कल्याण और वैभव देने वाली बताकर उनकी स्तुति करती है और कहती है कि गाने वाले का हृदय आनंद से भर जाता है। पद-दर-पद अर्थ ऊपर दिया है।

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी आरती कब गानी चाहिए?

लक्ष्मी पूजन के अंत में, रविवार, 8 नवंबर 2026 को नासिक में शाम 6:22 से 8:22 के मुहूर्त के भीतर (Drik Panchang)।

आरती में दीपक कितनी बार घुमाया जाता है?

परिवार आमतौर पर तीन, पांच या सात बार दक्षिणावर्त घुमाते हैं; अपने परिवार की रीति का पालन करें।

क्या पूरी आरती याद होना जरूरी है?

नहीं। पुस्तक या फोन से श्रद्धा के साथ पढ़ना पर्याप्त है और पूरा परिवार साथ गा सकता है।

क्या लक्ष्मी की मराठी आरती भी है?

हां। कई महाराष्ट्रीयन घर अपनी आरती-पुस्तक से मराठी महालक्ष्मी आरती गाते हैं, और हिंदी की “ॐ जय लक्ष्मी माता” भी व्यापक रूप से गाई जाती है।

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Abhay Mishra — AI Engineer at TechnoVeda AI Solutions

Abhay Mishra is an AI engineer at TechnoVeda AI Solutions in Nashik, Maharashtra. He built the Nashik Kumbh Yatri platform and researches ground-level logistics, temple traditions, transit routes and civic updates for the 2026–2028 Nashik-Trimbakeshwar Simhastha Kumbh Mela. About the author & our editorial standards →

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