गोवत्स द्वादशी 2026: कब है, पूजा का मुहूर्त और वसुबारस की परंपराएं
गोवत्स द्वादशी (वसुबारस) गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है। नासिक मुहूर्त शाम 5:58–8:31, गाय-बछड़े की पूजा विधि, सामग्री, कथा और भोजन के नियम।
गोवत्स द्वादशी, जिसे महाराष्ट्र में वसुबारस कहते हैं, गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है। यह दिवाली का पहला दिन है, जब शाम को गाय और बछड़े की पूजा होती है। नासिक में द्वादशी तिथि 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे से 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे तक है और प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 5:58 से 8:31 बजे तक है (Drik Panchang, नासिक, IST)।
अंतिम अपडेट: 3 नवंबर 2026
गोवत्स द्वादशी 2026: तारीख और मुहूर्त
| विवरण | 2026 (नासिक, IST) |
|---|---|
| तारीख | गुरुवार, 5 नवंबर 2026 |
| द्वादशी तिथि | 5 नवंबर सुबह 10:35 से 6 नवंबर सुबह 10:30 तक |
| प्रदोष गोवत्स द्वादशी मुहूर्त | शाम 5:58 से 8:31 बजे (2 घंटे 32 मिनट) |
| गाय पूजा का श्रेष्ठ समय | शाम, जब गायें घर लौटती हैं (गोधूलि बेला) |
| अगला दिन | धनतेरस, शुक्रवार 6 नवंबर |
| स्रोत | Drik Panchang, नासिक — 3 नवंबर 2026 को देखा गया |
द्वादशी तिथि 5 नवंबर की सुबह शुरू होती है और पूजा शाम को की जाती है, इसलिए तिथि 6 नवंबर की सुबह समाप्त होने पर भी पर्व 5 नवंबर को पड़ता है। कुछ पंचांग 6 नवंबर बता सकते हैं; आपके परिवार का पंचांग अलग हो तो उसका पालन करें।
गोवत्स द्वादशी (वसुबारस) क्या है?
गो यानी गाय और वत्स यानी बछड़ा, इसलिए गोवत्स द्वादशी का अर्थ है “गाय और बछड़े की द्वादशी”। महाराष्ट्र में यह पर्व वसुबारस के नाम से जाना जाता है (कुछ कथाएं वसु को उस धन और समृद्धि से जोड़ती हैं जो गाय घर में लाती है; बारस यानी बारह, द्वादशी तिथि)। गुजरात में इसी दिन को वाघ बारस कहते हैं। महाराष्ट्र में यह धनतेरस से पहले दिवाली का पहला दिन है।

वसुबारस की कथा
सबसे प्रचलित कथा कामधेनु की है, जो समुद्र मंथन से प्रकट हुई इच्छापूर्ति करने वाली गाय है। उसकी पुत्री नंदिनी महर्षि वसिष्ठ के आश्रम में रहकर उनकी पूजा और अतिथियों की आवश्यकताएं पूरी करती थी। माना जाता है कि वसुबारस नंदिनी और उसके माध्यम से हर उस गाय का सम्मान है जो परिवार का पालन करती है। इस दिन को संतान के कल्याण की प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है, इसीलिए कई माताएं व्रत रखती हैं।
घर पर वसुबारस पूजा विधि: चरण दर चरण
- स्थान तैयार करें। आंगन साफ करें, रंगोली बनाएं और उसके पास दिवाली का पहला दीपक जलाएं।
- गाय और बछड़े को नहलाएं या उनके पैर धीरे से धोएं। पशुओं को कभी जबरदस्ती या डराकर न संभालें।
- माला और तिलक। दोनों को गेंदे की माला पहनाएं और माथे पर हल्दी-कुमकुम लगाएं।
- पूजा करें। दीपक जलाएं, धूप, फूल, अक्षत (चावल) और जल अर्पित करें।
- खिलाएं। ताजी हरी घास, भीगी मूंग या बाजरा और गुड़ दें। केवल वही चीजें दें जो पशुओं के लिए सुरक्षित हों।
- आरती करें और गाय की परिक्रमा उसके पैरों से सुरक्षित दूरी रखकर करें।
- प्रार्थना करें बच्चों और परिवार के कल्याण की। फिर नैवेद्य को प्रसाद के रूप में लें।
गाय पास में न हो तो परिवार गाय और बछड़े की तस्वीर, मिट्टी या धातु की प्रतिमा से पूजा करते हैं, या शाम को पास की गोशाला जाते हैं। शांत समय चुनें, क्योंकि भीड़ और शोर से पशु घबराते हैं।
वसुबारस पूजा सामग्री
- गाय और बछड़ा, या दोनों की तस्वीर या छोटी मूर्ति
- गेंदे की मालाएं और खुले फूल
- हल्दी, कुमकुम और अक्षत (चावल)
- तेल या घी का दीपक, अगरबत्ती और कपूर
- जल से भरा छोटा पीतल का कलश और थाली
- पशुओं के लिए ताजी घास, भीगी मूंग या बाजरा और गुड़
- बाजरे की भाकरी और सब्जी (जैसे गवार), जो कई महाराष्ट्रीय घरों का प्रचलित नैवेद्य है
- रंगोली के रंग या चावल का आटा

वसुबारस के भोजन के नियम: क्या नहीं खाया जाता
व्रत रखने वाली कई महिलाएं इस दिन गेहूं और गाय के दूध से बनी चीजें (दूध, दही, घी) नहीं खातीं। इसका सामान्य कारण यह बताया जाता है कि उस दिन का दूध बछड़े का होता है। भोजन आमतौर पर बाजरे पर आधारित होता है — बाजरे की भाकरी के साथ गवार और मूंग जैसी सब्जियां। परंपराएं समुदाय और परिवार के अनुसार बदलती हैं और ये रिवाज हैं, नियम नहीं; स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह मानें।
महाराष्ट्र और भारत में वसुबारस
| स्थान | नाम और परंपरा |
|---|---|
| महाराष्ट्र | वसुबारस — शाम को गाय-बछड़े की पूजा; दिवाली की पहली रंगोली और दीपक; बाजरे का भोजन |
| गुजरात | वाघ बारस — वही दिन, दिवाली के उत्सव की शुरुआत |
| उत्तर भारत | गोवत्स द्वादशी — गाय और बछड़े की पूजा; कुछ क्षेत्रों में माताओं का व्रत |
| दक्षिण भारत के कुछ भाग | गाय नंदिनी के सम्मान में संबंधित व्रत |
इस वर्ष कुछ पंचांगों में रमा एकादशी भी इसी दिन बताई गई है, इसलिए कुछ परिवार दोनों व्रत रखते हैं। एकादशी के नियम अलग हैं; दोनों को कैसे निभाएं यह पंडित जी से पूछें।
दिवाली में पशुओं का सम्मान
- गाय को लंबे समय तक बांधकर न रखें और उसके आसपास भीड़ न लगाएं; कुछ ही लोग पर्याप्त हैं।
- गाय और आवारा पशुओं के पास तेज पटाखे न जलाएं, वे शोर से डरते हैं।
- ताजी घास या भीगा अनाज दें; पकाया हुआ या मीठा खाना और प्लास्टिक में लिपटी चीजें कभी न दें।
- त्योहार की बची मिठाई या तली चीजें पशुओं को न दें, वे उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं।
नासिक में वसुबारस: शाम की योजना
नासिक के लिए प्रदोष काल शाम 5:58 से 8:31 है। सूर्यास्त के तुरंत बाद पूजा की योजना बनाएं और रंगोली व पहला दीपक भी उसी समय रखें। इस वर्ष दिवाली नासिक–त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के शुरुआती सप्ताहों में पड़ रही है, इसलिए शाम को पंचवटी और रामकुंड के आसपास की सड़कों पर सामान्य से अधिक भीड़ और ट्रैफिक की उम्मीद रखें। कुंभ कैलेंडर के लिए नासिक कुंभ गाइड देखें।
आगे क्या
6 नवंबर को धनतेरस है; धनतेरस 2026 गाइड पढ़ें। पूरे पर्व के लिए दिवाली 2026 कैलेंडर और लक्ष्मी पूजन 2026 गाइड देखें।
Frequently Asked Questions
2026 में गोवत्स द्वादशी (वसुबारस) कब है?
गोवत्स द्वादशी गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है। नासिक में द्वादशी तिथि 5 नवंबर सुबह 10:35 से 6 नवंबर सुबह 10:30 तक है और शाम का प्रदोष मुहूर्त 5:58 से 8:31 बजे है (Drik Panchang, IST)।
महाराष्ट्र में वसुबारस दिवाली का पहला दिन क्यों है?
महाराष्ट्र में दिवाली धनतेरस से एक दिन पहले वसुबारस पर गाय-बछड़े की पूजा से शुरू होती है। दिवाली की पहली रंगोली और पहला दीपक आमतौर पर इसी शाम जलाया जाता है।
वसुबारस की कथा क्या है?
प्रचलित कथा कामधेनु की पुत्री नंदिनी की है, जो महर्षि वसिष्ठ के आश्रम में रहती थी। यह दिन नंदिनी और उसके माध्यम से सभी गायों का सम्मान है।
वसुबारस पर कौन सा भोजन नहीं खाया जाता?
व्रत रखने वाली कई महिलाएं गेहूं और गाय के दूध से बनी चीजें (दूध, दही, घी) नहीं खातीं, क्योंकि उस दिन का दूध बछड़े के लिए छोड़ा जाता है। भोजन आमतौर पर बाजरे का होता है। रिवाज परिवार के अनुसार बदलते हैं।
यदि घर में गाय न हो तो क्या करें?
परिवार गाय और बछड़े की तस्वीर, मिट्टी या धातु की प्रतिमा से पूजा करते हैं, या शांत समय में पास की गोशाला जाकर ताजी घास अर्पित करते हैं।
क्या वसुबारस और गोवत्स द्वादशी एक ही हैं?
हां। गोवत्स द्वादशी संस्कृत-आधारित नाम है और वसुबारस उसी द्वादशी तिथि के गाय-बछड़े के पर्व का मराठी नाम है।
माताएं वसुबारस का व्रत क्यों रखती हैं?
यह दिन संतान के कल्याण से जुड़ा है, इसलिए कई माताएं दिन के कुछ भाग में उपवास रखती हैं और बच्चों के स्वास्थ्य की प्रार्थना करती हैं।
वसुबारस पर गाय को क्या अर्पित किया जाता है?
ताजी हरी घास, भीगी मूंग या बाजरा और गुड़, साथ में फूल, कुमकुम और दीपक। केवल वही भोजन दें जो पशुओं के लिए सुरक्षित हो।
क्या 2026 में यह रमा एकादशी के दिन ही है?
कुछ पंचांग 5 नवंबर को रमा एकादशी भी बताते हैं, इसलिए कुछ परिवार दोनों व्रत रखते हैं। दोनों को कैसे निभाएं यह पंडित जी से पूछें।
Sources
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